Naxliyon ki Puri detail हिम्मत बढ़ाने में किसका हाथ है।

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Naxliyon की हिम्मत बढ़ाने में किसका हाथ है।

Chattisgarh: नक्सलियों का सफाया कब होगा कब तक हमारे जवानों को मारतेे रहेंगे हाफिज 

शाहिद से भी पाकिस्तानी आतंकियों से पहले नक्सलियों का सफाया करना जरूरी है जो हमारे ही अपने देश के नागरिक हैं। और ये डीमक तरह हमारे देश को कमज़ोर कर रहे हैं,आज हाफिज शहीद की तरह माड़वी हिडमा का भी पकड़े जाना जरूरी है नक्सलियों के खिलाफ हमारे जवानों की लड़ाई में मानव अधिकारियों की बेड़ियों से बंधे होते हैं।

आज बहुत से लोगो के मन में ये सवाल आता है की हमारे पास इतनी बड़ी सेना है अर्ध सैनिक बल है हमारे पास लाखों जवान है हमारे पास टेक्नोलॉजी है हमारे पास इतनी बड़ी एयरफोर्स है  तो फिर एक ही झटके में इन्हें समाप्त क्यों नही कर देते।आज तो हमारे पास इतने बड़े टेकोलॉजी आ चुके हैं बड़े बड़े मिसाईलस हैं तो फिर कौन सी बात रोक रही है, जो रोकती है वो है मानव अधिकार क्योंकि ये लोग हमारे ही अपने लोग हैं अपने ही नागरिक हैं  हम आतंकवादियों से तो आसानी से निपट सकते हैं जो बाहर से आते है लेकिन नक्सलवादी के खिलाफ हम ऐसा नहीं करते  क्योंकि ये लड़ाई अपनो के साथ है और हमारे हांथ ऐसे बंधे होते है जैसे कोई गिरफ्तारी से बंधी होती है। श्रीलंका में दो दशकों तक आतंक वादी संगठन लीब्रेसन टाईगर तमिल ईलम यानी LTTE के खिलाफ संघर्ष चला ये लोग तमिल भाषी लोगो को एक अलग देश बनाना चाहते थे कई वर्षों संघर्षों के बाद 2009 में श्रीलंका की सेना ने इस आतंकवादी संगठन का सफाया कर दिया।लेकिन इस दौरान मानव अधिकार का गंभीर आरोप लगाया गया,आज 12 वर्षों के बाद भी श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय संगठनों का विरोध जारी है।

में

दुनिया भर में जो मानव अधिकारों का जो बड़ी बड़ी दुकानें हैं,ये कई बार हमे अपने असली दुश्मनों से भी लड़ने से रोकती है। वर्ष 1967 में पहली बार नक्सल शब्द का इस्तमाल हुआ था  आप सोच रहे होंगे कि इन्हें नक्सली क्यों कहा जाता है इसका इतिहास क्या है। कुछ समय पश्चिम बंगाल में नक्सलवाड़ी के एक गांव में  किसान आंदोलन हुआ था जिसके तहत जमीनदारों की हत्या की गई थीं यानी नक्सल शब्द पश्चिम बंगाल के नक्सलवाड़ी गांव से शुरू हुआ था।आज भारत के ओडिशा,मध्यप्रदेश,तेलांगना, महाराष्ट्र, छतीसगढ़, झाखंड,बिहार,और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में नक़ल

 की प्रभाव है जहां सुरक्षा बलों पर आय दिन ऐसे ही हमले होते रहते हैं। वर्ष 2010 में 200 जिले में नक्सल प्रभावित थे।

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