निलम्बित एडीजी ने “बदलापुर” पर लगाई मोहर, हाईकोर्ट में कही यह बड़ी बात

बिलासपुर 15 जुलाई। छत्तीसगढ़ के निलम्बित एडीजी आईपीएस अफसर जी पी सिंह ने अंततः “बदलापुर” पर मोहर लगा दी है। सिंह ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पेश एक याचिका में जो कुछ कहा है, वह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमनसिंह के सरकार बदलने के बाद से लगाये जा रहे उस आरोप की पुष्टि करते हैं जिसमें कहा जाता रहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बदलापुर की राजनीति कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमनसिंह की घेराबंदी शुरू कर दी थी। यही नहीं डॉ रमनसिंह के साथ उनकी पत्नी और पुत्र पर भी लांछन लगाया जाने लगा था। तब सहज, सरल, शांत और शालीन डॉ रमनसिंह ने इस प्रयास को “बदलापुर” करार दिया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके सिपहसालारों ने तब इसे एक सिरे से खारिज़ कर दिया था, लेकिन अब एडीजी जी पी सिंह के आरोप के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के कथन को हवा में उड़ाना आसान नहीं रह गया है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रदेश के सीनियर आईपीएस अधिकारी जी पी सिंह (ए डी जी) पर अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाकर EOW और ACB ने छापामार कार्रवाई की थी। ऐसा बताया गया है कि उनके घर से 10 करोड़ रुपयों की अनुपातहीन सम्पत्ति का पता चला है। यही नहीं जी पी सिंह के खिलाफ पुलिस में राजद्रोह का भी अपराध दर्ज किया गया है।

इस कार्रवाई के बाद ही जी पी सिंह (ए डी जी) ने हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका दाखिल कर अपने विरुद्ध की गई कार्रवाई की CBI से जांच कराने की मांग की है। जानकारी के मुताबिक लगभग 90 पृष्ठों की याचिका में निलंबित एडीजी जी पी सिंह की ओर से कहा गया है कि नान केस में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमनसिंह और उनकी पत्नी श्रीमती वीणा सिंह को आरोपी बनाने का का दबाव राज्य सरकार बना रही थी। सी एम हाउस में नान सहित अन्य संवेदनशील केस के रिव्यू के दौरान यह निर्देश उन्हें दिए गए थे। याचिका में कहा गया है कि इन्हीं निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण उन्हें ब्यूरो से हटाया गया और अब उनके विरुद्ध ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

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