देवेन्द्र पाण्डेय का एक और कु-कृत्य उजागर –

सृष्टि की आड़ में वन और निस्तारी भूमि पर बेजा कब्जा

कोरबा 18 जुलाई। सोहागपुर धान घोटाला और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बिलासपुर के सौ करोड़ रूपयों से अधिक के घोटाले के आरोपी कथित भाजपा नेता देवेन्द्र पाण्डेय का एक और कु-कृत्य उजागर हुआ है। जनसेवा की आड़ में सृष्टि इंस्टीट्यूट के आसपास के वन विभाग की भूमि और निस्तारी की भूमि पर बेजा कब्जा कर देवेन्द्र पाण्डेय ने फेंसिंग कर लिया है। इस कु-कृत्य का खुलासा राजस्व विभाग के सीमांकन में रविवार को हुआ है।

जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग को शिकायत मिली थी कि सृष्टि इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एण्ड रिसर्च सेन्टर के द्वारा रिसदी गांव की निस्तारी और वन विभाग की बेशकीमती वन भूमि पर बेजा कब्जा कर लिया गया है और सृष्टि की जमीन के साथ फेंसिंग कर शामिल कर लिया गया है। राजस्व विभाग ने इस शिकायत के आधार पर मौके पर पहुंचकर रविवार 18 जुलाई 2021 को सीमांकन प्रारंभ किया। इस दौरान सृष्टि के पूर्व अध्यक्ष देवेन्द्र पाण्डेय भी मौके पर पहुंचे। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार राजस्व अधिकारियों ने निस्तारी और वन-भूमि पर फेंसिंग कर कब्जा क्यों किया गया है? पूछा तो देवेन्द्र पाण्डेय ने दलील दी कि गांव के पालतू पशु कैम्पस में घुस आते थे, इसलिए उन्हें रोकने के लिए फेंसिंग कराई गयी है।

रिसदी के ग्रामीणों की मानें तो कथित भाजपा नेता देवेन्द्र पाण्डेय से पूरा गांव आंतकित रहता है। अपनी राजनीतिक और उच्च प्रशासनिक पहुंच की धौंस देकर लम्बे समय से ग्रामीणों को भयभीत करता आ रहा है। उसके डर के कारण गांव का कोई भी निवासी उसके बेजा कब्जा और अन्य हरकतों की शिकायत नहीं करता। ग्रामीणों के अनुसार सृष्टि द्वारा निस्तारी जमीन और वन-विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा कर लेने के कारण उनका निस्तार प्रभावित होता आ रहा है, लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति से कौन दुश्मनी मोल ले यह सोचकर रिसदी के ग्रामीण मूक-दर्शक बने रहे हैं।
सृष्टि इंस्टीट्यूट के संरक्षक, रामपुर क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के पुत्र और जिला पंचायत सदस्य संदीप कंवर ने सीमांकन में वन-भूमि पर बेजा कब्जा का पता चलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग को उक्त भूमि को मुक्त कर अपने अधिकार में ले लेना चाहिये। संस्था के संरक्षक और उनके पिता ननकीराम कंवर हमेशा गलत कार्यों के खिलाफ रहे हैं। उन्हें जानकारी होती तो वे कदापि बेजा कब्जा नहीं करने देते।

यहां उल्लेखनीय है कि सृष्टि इंस्टीट्यूट के पूर्व अध्यक्ष देवेन्द्र पाण्डेय सबसे पहले जिले के सोहागपुर धान खरीदी केन्द्र में एक करोड़ रूपयों से अधिक के धान खरीदी घोटाला को लेकर सुर्खियों में आये थे। इस मामले के आरोपियों ने देवेन्द्र पाण्डेय के दबाव में घोटाला करने और घोटाले का अस्सी लाख रूपया उन्हें देने का आरोप लगाया था। इसके बाद जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष के रूप में एक सौ करोड़ रूपयों से अधिक के विभिन्न घोटालों का देवेन्द्र पाण्डेय पर आरोप लगा था। बैंक में हुए घोटालों की एक समिति ने जांच भी की है, जिसमें विभिन्न कार्यों में घोटाला होना पाया गया है।

बहरहाल सीमांकन का कार्य प्रगति पर है। प्रारंभिक सीमांकन में निस्तारी और वन-भूमि पर बेजा कब्जा की पुष्टि हो चुकी है। सीमांकन पूर्ण होने के बाद सृष्टि के पूर्व अध्यक्ष देवेन्द्र पाण्डेय ने बेजा कब्जा कर रखा है, इसका विस्तृत विवरण प्राप्त हो सकेगा। देखना है कि राजस्व विभाग सीमांकन के बाद अतिक्रमण हटाता हैं अथवा नहीं?

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