उत्तराखंड में हरियाली यहां हरेली, एक लक्ष्य रक्षित हो वानिकीः डॉ.बिजलवां

कोरबा 18 जुलाई। उत्तराखंड में हरेला राजकीय पर्व है। छत्तीसगढ़ में इसे हरेली के रूप में मनाया जाता है। इसकी मुख्य अवधारणा वानिकी को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना है। परंपरागत तरीके से वनों के संरक्षण के लिए गड़वाल हिमालय के ओक पर अधययन में पता चला कि यह वृक्ष जल विज्ञान चक्र को नियंत्रित करने, मृदा एवं नमी संरक्षण, कार्बन मात्रा पृथकरण तथा बहु क्रियाशील भूमिका निभाती है।

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र कटघोरा की ओर से एक माह का वन महोत्सव -प्लानटेशन इन डीग्रेडेड लेंड आफ कोरबा का आयोजन किया जा रहा है। यह बातें वरिष्ठ वैज्ञानिक, विभागाध्यक्ष संयुक्त निदेशक-विस्तार कृषि वानिकी विभाग वानिकी महाविद्यालय उत्तराखंड डा अरविंद बिजलवां ने कहीं। ग्रीन लेक्चर सीरीज का उद्घाटन डा एसएल स्वामी, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कटघोरा, कोरबा ने किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के क्षरण के लिए मानव जिम्मेदार हैं। इसके संरक्षण के लिए लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने की बहुत अधिक आवश्यकता है। इस कार्यक्रम श्रृंखला में पहले पांच दिन ग्रीन लेक्चर सीरीज का कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम का आयोजन डा एसएल स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कटघोरा, कोरबा के निर्देशन में किया गया। डा एसडी उपाध्याय ने पर्यावरणीय चुनौतियों का मुकाबला करने में जंगल के बाहर पेड़ की भूमिका विषय पर परिचर्चा की। उन्होंने पर्यावरणीय समस्याओं का कारण जैव विविधता का ह्रास, ग्लोबल वार्मिग, भूमि क्षरण, जंगल का सिकुड़न, ईंधन, चारे की कमी, पोषण संबंधी असुरक्षा, पर्यावरण प्रदूषण आदि को बताया तथा इन सभी से उबरने के लिये वृक्षों एवं वनों पर खास जोर दिया। कालेज की ओर से आयोजित ग्रीन लेक्चर सीरीज में संस्था एवं कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्ना छात्र-छात्राओं, वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों ने आनलाइन के माध्यम से भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित हुए। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।

डा केटी पारतीबन ने वानिकी विषय पर कहा कि आर्थिक व पर्यावरणीय स्थिरता के लिए पौधरोपण बहुत जरूरी है। वर्ष 2030 तक कुल 33 प्रतिशत क्षेत्र को वनों से ढकने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि वानिकी क्षेत्र विश्व में 1023 मिलियन हेक्टेयर और भारत में 13.75 मिलियन हेक्टेयर है। वैकल्पिक औद्यौगिक लकड़ी की प्रजाति बबूल, एक्रोकारपस, तुना महोगनी, चारा वृक्षारोपण शीशम, शहतूत, कचनार, अर्जुन वृक्ष, मल्टी क्लोनल एग्रो फारेस्ट्री इसके तहत जैव इंधन पौधे, वन चारागाही मॉडल, अधिक मूल्य वाले पौधे, गैर लकड़ी वन उत्पाद से आर्थिक लाभ ले सकते हैं।

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